दीदी और मेरी चुदाई कि दास्तान Hindi Sex Story

दीदी और मेरी चुदाई कि दास्तान Hindi Sex Story
Total views : 315
प्रेषक : राज
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है, में 21 साल का हूँ, आप सभी की तरह में भी भीआईपीचोटी डॉट कॉम पर पिछले कुछ सालों से लगातार सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ ऐसा करके मेरा मन बहुत शांत रहता है और फिर एक दिन मैंने अपना भी सेक्स अनुभव लिखने के बारे में विचार बनाया और आज वो आप लोगों के सामने है। दोस्तों यह मेरी आज की कहानी मेरे और मेरी बहन के बीच की एक सच्ची घटना है जिसमे आज में आप सभी को बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी बहन को चोदा? और ना सिर्फ चोदा, बल्कि उनको एक अनमोल उपहार भी दिया, वो अनमोल उपहार है एक बेटी, जो कि मेरी है और में अपनी बेटी से बहुत प्यार करता हूँ। मेरी बहन का नाम सपना है, उसकी उम्र 26 साल है, वो दिखने में एक बहुत सुंदर लगती है और अब उसकी शादी हो चुकी है। दोस्तों वैसे तो मेरी बहन पर मेरी बुरी नियत शुरू से ही थी, मेरा उस पर मन कैसे खराब हुआ? यह आज में आप भी को बताने जा रहा हूँ। दोस्तों उन दिनों में 12वीं क्लास में था, तो किसी कारण से उस दिन मेरे स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई और उस दिन में अपने घर जल्दी आ गया। फिर जब में अपने घर पहुँचा तब मैंने देखा कि मेरे पापा ऑफिस जा चुके थे और माँ भी घर में नहीं थी।
फिर मैंने अपनी दीदी से पूछा कि माँ कहाँ है? तब दीदी मुझसे कहने लगी कि माँ पड़ोस में गई है, उनके यहाँ कोई पूजा है जिसकी वजह से वो देर से घर आएगी। फिर मैंने उनको कहा कि ठीक है और फिर में अपने कमरे में बैठकर पढ़ाई करने लगा था। दोस्तों हमारे घर में बाथरूम नहीं था और उन दिनों हम सभी लोग बाहर आंगन में हेडपंप के पास ही बैठकर नहाते थे। फिर जब माँ और दीदी नहाने जाती थी, तब वो कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद कर देती थी। फिर जब में उस दिन पढ़ाई कर रहा था, तब दीदी मुझसे कहने लगी कि राज में नहाने जा रही हूँ, तुम पढ़ाई करो में तब तक दरवाज़ा बाहर से बंद कर देती हूँ। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है और फिर दीदी इतना मुझसे कहकर बाहर चली गई और उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया, लेकिन उस दिन गलती से कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं हुआ था। फिर उनके बंद करते ही दरवाज़ा थोड़ा सा खुल गया था, लेकिन उसके ऊपर दीदी ने ध्यान नहीं दिया। अब दीदी नहाने के लिए बैठ गई, तभी अचानक से मेरी नजर उन पर पड़ी तो मैंने देखा कि दीदी नहाने के लिए अपने कपड़े उतार रही है। अब में दीदी को देखकर एकदम चकित रह गया था और में अपनी चकित नजरों से लगातार उन्हें घूरकर देखता ही रहा।
दोस्तों ज्यादातर समय दीदी घर में टॉप और स्कर्ट ही पहनती है। फिर मैंने दीदी को देखा, तो वो उस समय अपना टॉप उतार रही थी और अब मेरे देखते देखते उन्होंने अपनी स्कर्ट को भी उतार दिया था। अब उस वजह से दीदी सिर्फ ब्रा-पेंटी में थी, में तो दीदी को पहली बार उस हालत में देखता ही रह गया था और में बड़ा चकित था क्योंकि मैंने उनका वो रूप पहली बार देखा था। फिर दीदी ने कुछ देर बाद अपनी ब्रा-पेंटी को भी उतार दिया और नहाने लगी और वो पूरी तरह से नंगी होकर अब नहाने लगी थी और अपने बदन पर साबुन लगाते हुए अपने बूब्स को दबा रही थी। अब में वो सब देखकर बड़ा ही गरम उत्तेजित हो गया, दीदी करीब दस मिनट तक वैसे ही अपने बदन को दबाकर रगड़ते हुए नहाती रही और में उनके नंगे बदन को घूरकर देखता रहा और फिर उसके बाद दीदी कपड़े पहनकर कमरे में आ गई। दोस्तों उस दिन वो द्रश्य देखने के बाद से मेरी नियत दीदी के लिए बड़ी खराब हो चुकी थी और फिर जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता, तब में उन्हें नंगा देखने की कोशिश करने लगा था। दोस्तों हमारे घर में बस दो ही कमरे है तो एक कमरे में मेरी माँ-पापा सोते थे और दूसरे कमरे में मेरी दीदी और में सोता था। अब मेरे कमरे में बड़ा पलंग होने की वजह से हम दोनों एक साथ ही उसी पर सोते थे।
फिर एक रात को मैंने सही मौका पाकर देर रात को सोते हुए दीदी के जिस्म से खेलना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी तरफ से मुझे कोई भी हलचल महसूस नहीं हुई जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से भी ज्यादा अब बढ़ चुकी थी। अब जब भी वो रात में सोती थी, तब में मौका पाकर उनके बूब्स को दबाता और उसकी स्कर्ट के अंदर अपना एक हाथ डालकर उनकी पेंटी के ऊपर से ही दीदी की चूत से खेलने लगा था। फिर कुछ दिन जब कुछ नहीं हुआ तो मेरी हिम्मत अब ज्यादा ही बढ़ गई और में अपना हाथ उनके कपड़ो के अंदर डालने लगा था और उनके बूब्स और चूत से खेलने लगा था, लेकिन दीदी को कभी ना कभी तो पता चलना ही था। एक दिन में पकड़ा गया, में उस समय बहुत डर गया था और में अपनी दीदी के आगे बड़ा गिड़गिड़ाया उनको कहने लगा कि प्लीज दीदी आप माँ-पापा से कुछ भी मत कहना। अब वो मेरा कहा मान तो गई, लेकिन साथ में उन्होंने मुझे धमकी भी दे दी कि अगर अगली बार से मैंने ऐसा कुछ किया, तो वो मेरी कोई भी बात नहीं सुनेगी और माँ-पापा को मेरी सभी हरकतों के बारे में जरुर बता देगी। फिर मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है मुझे आपकी हर बात मंजूर है, ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा, लेकिन इस बार आप मेरी गलती को माफ कर दो।
फिर दिन ऐसे ही बीतने लगे थे, अब मैंने वो सब काम तो छोड़ दिए थे, लेकिन उनको चोदने की इच्छा तो मेरे मन अब भी थी और वो मेरे मन से बिना चुदाई किए नहीं जाने वाली थी। फिर जब वो 24 साल की हुई तब उनकी शादी हो गई और वो अपने ससुराल चली गई और फिर उसके बाद से ही मेरे अच्छे दिन शुरू हो गये। फिर शादी के बाद जब पहली बार दीदी मेरे घर आई, तब दीदी बहुत सुंदर लग रही थी। फिर रात को जब हम सोने गये, तब पता नहीं मेरे मन में क्या हुआ? मैंने फिर से उनके बदन को छूना शुरू किया। अब वो उस साड़ी में ही सो रही थी, तब मेरा हाथ उनकी पतली गोरी चिकनी कमर पर चला गया। फिर उसी समय मैंने दीदी के मुँह से हल्की सी आह की आवाज सुनी और मुझे थोड़ा अजीब सा लगा, लेकिन फिर मेरी उससे आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। फिर अगली सुबह मेरी कुछ जल्दी ही आंख खुल गई, तब मैंने पाया कि दीदी मुझसे चिपकी हुई थी और उनका पैर मेरे ऊपर था और उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर उठी हुई थी और उनका हाथ मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़े हुए था।
अब मुझे यह सब देखकर बहुत अच्छा लगा, तब मैंने भी अपनी तरफ से थोड़ी बदमाशी करने का विचार बना लिया और फिर मैंने उनका हाथ पहले तो अपने लंड पर से हटा दिया और फिर मैंने अपनी पेंट को खोला और थोड़ी नीचे करके और अपना अंडरवियर भी थोड़ा सा नीचे सरका लिया जिसकी वजह से मेरा लंड अब बिल्कुल फ्री होकर आजाद हो गया था। फिर मैंने दीदी का हाथ अपने नंगे लंड पर रखा और धीरे-धीरे दीदी के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, तब मैंने देखा कि वो अंदर काले रंग की ब्रा पहने हुए थी। अब में वैसे ही लेटा रहा, जब थोड़ी देर के बाद दीदी की आँख खुली तब शायद वो एकदम चकित रह गई। फिर मैंने डर की वजह से अपनी आंख नहीं खोली, लेकिन मुझे इतना जरूर लगा था कि वो थोड़ी सी हड़बड़ा जरुर गई है। फिर मैंने कुछ देर बाद अपनी आँख थोड़ी सी खोली तब मैंने देखा कि दीदी अपने ब्लाउज के बटन बंद कर रही थी, मैंने फिर से अपनी आँख को बंद कर लिया। अब दीदी ने मेरे लंड को मेरे अंडरवियर में छुपाया और वो तुरंत उठकर कमरे से बाहर चली गई। दोस्तों हम हर रात को सोते समय अंदर से कमरे का दरवाजा बंद करके सोते है इस वजह से किसी को कुछ पता नहीं चला था।
फिर थोड़ी देर के बाद में भी उठा, लेकिन अब मुझे बहुत डर लग रहा था कि बाहर पता नहीं क्या हो रहा होगा? कहीं दीदी माँ से तो वो सभी बातें नहीं बोल देगी? फिर थोड़ी देर तक में वैसे ही बैठा सोचता रहा। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी मेरे लिए चाय लेकर मेरे कमरे में आ गई और उन्होंने मुझे चाय दे दी, वो मुझसे कुछ नहीं बोली थी, लेकिन उस समय वो बहुत शांत ना जाने किस सोचा विचारी में लगी हुई थी। अब मेरी तो हालत धीरे धीरे खराब हो रही थी और में चाय पीने के बाद अपने कमरे से बाहर आ गया, मैंने देखा कि पापा अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे और माँ अपने कामों में लगी थी और दीदी भी शांत लगने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शायद उसके दिमाग में वही सब घूम रहा था। फिर उन्होंने किसी से इस बात को नहीं कहा और वो दिन ऐसे ही निकल गया। फिर उस रात को जब हम सोने गये, तब दीदी अपनी उसी पुराने कपड़ो में थी जिसको वो शादी से पहले हमेशा पहना करती थी, वो टॉप-स्कर्ट में मेरे सामने थी। अब मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि चलो आज शायद बहुत दिनों के बाद मज़े करने का मौका मिलेगा।
फिर रात इसी तरह से गुज़रने लगी थी और थोड़ी देर के बाद में अचानक से उठा, दीदी ने मुझसे पूछा क्या हुआ? तब मैंने कहा कि कुछ नहीं, में जरा पेंट बदलकर अभी आता हूँ, में थोड़ा अजीब सा महसूस कर रहा हूँ। अब दीदी ने कहा कि रोज तो तुम ऐसे ही सोते हो, तो आज क्या समस्या है? मैंने कहा कि सुबह मेरे पैर में चोट लगी थी जिसकी वजह से थोड़ा सा कट लगा और पेंट की वजह से मुझे थोड़ा सा दर्द हो रहा है। फिर दीदी बोली कि हाँ ठीक है, तुम जाकर लुंगी पहन लो में उनकी वो बात सुनकर बड़ा खुश हो गया और तुरंत ही कपड़े बदलकर आ गया। अब मैंने अपनी पेंट के साथ-साथ अपनी अंडरवियर को भी उतार दिया था और फिर हम दोनों सो गये। फिर रात में मैंने महसूस किया कि दीदी का हाथ एक मेरी लुंगी के ऊपर से ही मेरे लंड पर था, तब मैंने अपनी लुंगी को पूरी खोलकर अलग कर दिया और में नीचे से पूरा नंगा हो गया। अब मेरा लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हो गया था, मैंने ऊपर भी कुछ नहीं पहना था और अब में पूरी तरह से नंगा था। फिर मैंने दीदी का एक हाथ अपने लंड पर रखा और उसके टॉप के बटन खोलने लगा। तभी दीदी थोड़ी हिली और मेरा लंड ज़ोर से पकड़ लिया उसके बाद वो मुझसे और भी ज्यादा चिपक गई अपने होंठ मेरे बहुत पास ले आई।